विवाह रेखा, प्रणय रेखा, प्रेम रेखा के बारे में सामान्यतः बहुत लोगों की जानने की उत्सुकता रहती है। ज्योतिष एवं हस्तरेखा ज्ञान के बारे में आज के दौर में थोड़ी बहुत जानकारी हर किसी को होती है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड से आ रहे हैं हस्तरेखा ज्ञान की पुस्तक ले ली और उसमे यहाँ वहां पढ़कर अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने का बहुत लोग प्रयास करते देखे गए हैं, इनमें एक विचार विवाह रेखा सम्बन्धी भी हुआ करता है। ऐसे लोग कनिष्ठका अंगुली के मूल के नीचे और हृदय रेखा के ऊपर हाथ के बाहरी भाग से प्रारम्भ होकर बुध क्षेत्र की तरफ जाती हुई रेखाएं जितनी संख्या में देखते हैं, उतने ही विवाह या प्रेम सम्बन्ध समझ लेते हैं तथा अपने परिजन, मित्र आदि का हाथ देखकर उतने ही विवाह, प्रेम सम्बन्ध आदि की घोषणा कर देते हैं, यहाँ तक की कुछ लोग अपनी पत्नी या पति का हाथ देखकर मन ही मन में ऐसी कोई धारणा भी विकसित कर लेते हैं। यह सही कि प्रायः कर सभी ज्योतिष शास्त्रियों ने विवाह रेखा एवं प्रेम रेखा (Love Lines) को उक्त स्थान पर ही माना है, केवल शैव सामुद्रिक आदि एक दो मत ही विवाह रेखा का स्थान शुक्र पर्वत पर मानता है। वास्तव में उक्त मत ही अनुभव की कसौटी पर ज्यादा सही आ रहा है जिसमें कनिष्ठका अंगुली के नीचे एवं हृदय रेखा के ऊपर के भीतर जितनी रेखाएं स्पष्ट एवं गहरी हो उतने विवाह या गहरे सम्बन्ध स्थापित होंगे । किन्तु यह पूरी तरह से पर्याप्त नहीं है कि केवल सामान्य आधार पर देखकर उक्त अनुसार हम विवाह या किन्हीं संबंधों की संख्या को इस अनुसार निश्चित कर लें या प्रेम सम्बन्ध आदि के बारें कोई प्रकार का निर्णय कर लें। ऐसा भी बहुधा देखा गया है जब हाथ में स्पष्ट विवाह रेखा हो और ऐसे लोगों की शादी ही नहीं हुई है । बहुत लोग विवाह नहीं करते, उनसे यदि आपके घनिष्ठ सम्बन्ध हैं तो वे स्पष्ट बता देंगे की न तो उनका विवाह हुआ है और न ही किसी से प्रेम सम्बन्ध। विवाह रेखा के अलावा प्रेम सम्बन्धों की जानकारी करने के लिए उक्त रेखाओं के साथ शुक्र एवं मंगल पर्वतों की स्थिति एवं उन पर मौजूद प्रभाव रेखाओं को भी एक साथ समन्वय करके देखने की आवश्यकता रहती है , साथ ही इसके लिए विवाह रेखा की मौजूदगी स्थान पर भी बारीकी से जांच करनी पड़ती है। लेकिन यहाँ यह स्पष्ट करना पुनः उचित होगा कि केवल मात्र कनिष्ठका अंगुली के नीचे एवं हृदय रेखा के ऊपर स्थित स्थान पर मौजूद विवाह रेखा के नीचे या ऊपर स्थित छोटी एवं हल्की पतली रेखाओं को हम प्रथम दृष्टया ही प्रेम रेखाएं मानकर भ्रमित हो जावें और जल्दी से परिणाम निकाल लें, यह किसी प्रकार से उचित नहीं है । कई लोग सामान्य रूप से ऐसा देखकर अपनी पत्नी या पति तक के प्रति शक पाल करके अंदर ही अंदर तनाव बनाए रखते हैं, यह पूर्णतः अनुचित है। हम आगे इसी विषय को विभिन्न हाथों के लिए गए चित्रों आदि के साथ विभिन्न मतों के परिप्रेक्ष्य में समय समय पर प्रस्तुत करेंगे, ज्योतिष बंधुओं एवं इस विषय में रूचि रखने वाले जानकार महिला / पुरुषों से भी अपेक्षा करेंगे कि उन्होंने अपने अनुभवों में जो महसूस किया है, उससे हमें लिए गए हस्त चित्रों आदि के साथ अवगत करावें, ताकि इस विषय पर ज्यादा से ज्यादा अनुभव की कसौटी पर प्रमाणिक जानकारी प्रस्तुत की जा सके।
For further info. contact me on:
no.- 9782560245
and my facebook-
For further info. contact me on:
no.- 9782560245
and my facebook-
No comments:
Post a Comment