Thursday, 3 September 2015

marriage line in palmistry - love marriage 2

भारतीय प्राचीन शास्त्रों में ज्यादातर मत  कनिष्ठका के नीचे एवं हृदय रेखा के बीच हथेली के करतल  पर स्थित रेखा को विवाह रेखा मानते हैं वहीँ पाश्चात्य मत इसे प्रणय रेखा का नाम देते हैं।  उनके मत में शुभ लक्षणों युक्त वाले हाथ में एक लम्बी और गहरी रेखा को विवाह रेखा माना जा सकेगा, यदि हाथ में अन्यत्र भी पुष्टि करने वाले लक्षण हो। हमारा मत है कि सामान्य रूप से विवाह रेखा एवं प्रेम सम्बन्धी रेखाओं का निर्णय इसी मुख्य स्थान से  किया जावे, किन्तु निर्णय लेते समय देश, काल एवं पात्र का विचार आवश्यक है, गहरी मुख्य विवाह रेखा के नीचे या ऊपर पतली हल्की रेखाओं को प्रेम रेखा या किसी विपरीत लिंगी से attachment का संकेत माना जा सकता है किन्तु अन्य लक्षणों के साथ इस हेतु ठोस रूप से शुक्र पर्वत की स्थिति  को विशेष रूप से  देखना आवश्यक होगा । हाथ में अन्य लक्षण बलवान नहीं होते, तब उनके फल स्वप्न में ही प्राप्त होते हैं या मस्तिष्क पर लगातार प्रभाव डालने रेखाएं भी ऐसी प्रणय रेखाओं के रूप में स्थान बना लेती है और ऐसी स्थितियों में हम अनुचित रूप से किसी को प्रेम सम्बन्ध होने की घोषणा कर दें, यह अनुचित होगा।  विवाह कब होगा देखने के लिए हृदय रेखा की तरफ से कनिष्ठका के बीच के स्थान को दो भागों में बांटना होगा, हृदय रेखा की ओर स्थित आधे भाग में विवाह रेखा हो तो जवानी के प्राम्भ में तथा जितनी हृदय रेखा से इसकी नजदीकी हो उतनी जल्दी विवाह होता है और यदि कनिष्ठका अंगुली वाले आधे भाग में विवाह रेखा हो तो ढलती जवानी में विवाह होता है।  यहाँ भी  देश, काल, जाति  एवं पात्र के अनुसार जल्दी एवं देर अवस्था किसे कहेंगे, अनुसार निर्णय लेना होगा।
   प्रेम या लव लाइन्स के बारे में कुछ मत शुक्र पर्वत पर मूल से उठती हुई रेखाओं को और कुछ मत अंगुष्ठ के मूल से शुक्र पर्वत पर जीवन रेखाओं की  तरफ बढ़ती हुई रेखाओं को प्रेम या प्रणय रेखाएं  या  विपरीत लिंगी से  अटेचमेंट व  सम्बन्ध  की रेखाएं मानते हैं। हमने विभिन्न मतों के परिप्रेक्ष्य में विभिन्न हाथों पर इसके परीक्षण द्वारा आधुनिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए एक स्पष्ट मत बनाने की बहुत कोशिश की है। किन्तु  इस विषय में बहुत मत हैं तथा विभिन्न ग्रह पर्वतों को ध्यान में रखते हुए देश, काल, जाति, वर्ग एवं पात्र के अनुसार निर्णय लेने  के निर्देश हैं, इसलिए स्थिति  बड़ी धुंधली है।  चूँकि मैं तो हस्तरेखाविद होने से पहले एक ज्योतिर्विद एवं न्यूमरॉलोजिस्ट हूँ, अतः जन्मपत्री होने की स्थिति में सर्व प्रथम जन्मपत्री द्वारा, जन्मपत्री नहीं होने की स्थिति में अंक ज्योतिष आदि का सहारा लेकर किसी निर्णय पर पहुँचता हूँ। अभीष्ट कार्य होगा या नहीं, इस कार्य में इस समय इन्वेस्टमेंट करूँ या नहीं, मुकदमें में स्वयं के  हित  में निर्णय होगा या नहीं, क्या प्रेम विवाह होगा तरह के  विभिन्न प्रकार प्रश्नों का सटीक उत्तर  भारतीय ज्योतिष विज्ञान  की अन्य शाखाओं यथा प्रश्न ज्योतिष विज्ञान, स्वर शास्त्र  आदि  के आधार पर चमत्कारिक रूप से  तुरंत निर्णीत हो जाते  हैं । जब  हस्तरेखा द्वारा ही फलादेश की अपेक्षा हो, यानी जन्मकुंडली आदि नहीं हो तो उस दौरान   जीवन रेखा, विवाह रेखा आदि द्वारा किसी घटना के घटित होने या विवाह का वर्ष जानने में अंक ज्योतिष का सपोर्ट ही सबसे अधिक कारगर है।  विश्व विख्यात हस्तरेखाविद कीरो ने घटना के घटित होने का वर्ष एवं दिन आदि  निकालने सम्बन्धी की गई अपनी सटीक भविष्यवाणियों में हस्तरेखा सम्बन्धी रेखाओं के साथ  प्रायःकर अंक ज्योतिष का सहारा अवश्य लिया होगा ऐसा मैं मानता हूँ।
   इसलिए मैंने इस सम्बन्ध में अपनी पहले  वाली पोस्ट पर सभी ज्योतिष प्रेमियों से अनुरोध किया है कि वे अपने अनुभव या जानकारियों को पुस्तकों के चित्रों के स्थान पर स्वयं के या अपने परिचितों आदि के  हस्त चित्रों के साथ अनुभवों के परिणामों के परिप्रेक्ष्य में ज्यादा से ज्यादा सामने लाएं और धुंधली पड़ी इस तस्वीर को साफ करे,  जिससे हस्तरेखा विज्ञान का यह पक्ष स्वतन्त्र रूप से मजबूत हो सके। मैंने जो हस्त चित्र समय समय पर अपने परामर्श के दौरान विगत वर्षों में लिए हैं, वो मैं समय समय पर अपनी उपलब्ध समय एवं श्रम शक्ति के अनुसार, उनके जीवन के घटे उक्त प्रसंगों के साथ जल्दी ही यहाँ व अपने पेज पर शेयर करूँगा, आप भी पेज पर शेयर करें,  अभी कुछ अरसे तक अपना टॉपिक विवाह एवं प्रेम रेखाओं पर केंद्रित रहेगा।
मेरा निम्न पेज हैं जिन पर आप अपने अनुभव शेयर कर सकते हैं एवं इस विषय में शोध एवं अनुसंधान को गति देने में भागीदार बन सकते हैं।
हस्तरेखा,ज्योतिष,वास्तु एवं रेकी द्वारा सुख शांति एवं समृद्धि।
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