Tuesday, 22 March 2016

अखिल भारतीय ज्योतिष महासम्मेलन में भारतीय विद्याओं, मन्त्रों, प्रमुखत: वैदिक मंत्रो आदि के परिप्रेक्ष्य में सुख, शांति, समृद्धि बढ़ाने के साथ विश्व एवम् देश के सामने आने वाली चुनोतियों के समाधान पर होगा वाचन - ज्योतिष प्रज्ञाचार्य महावीर कुमार सोनी

श्री श्री 1008 ब्रह्मपीठाधीश्वर संत श्री नारायण दास जी महाराज द्वारा 'अखिल भारतीय ज्योतिष एवम् वास्तु महासम्मेलन' को मंगल आशीर्वाद

जयपुर। इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एन्ड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट की ओर से जयपुर में दिनाक 7 एवम् 8 मई को होने जा रहे 'अखिल भारतीय ज्योतिष एवम् वास्तु महासम्मेलन" को श्री श्री 1008 ब्रह्मपीठाधीश्वर संत श्री  नारायण दास जी महाराज का मंगल आशीर्वाद प्राप्त हुआ। सेमीनार के मुख्य समन्वयक ज्योतिर्विद् महावीर कुमार सोनी एवम् संयोजक आचार्य घनश्याम शर्मा ने इस अवसर पर श्री नारायण दास जी महाराज को बताया गया कि देश में पहली बार ज्योतिष, वास्तु एवम् रेकी के साथ भारतीय विद्याओं, मन्त्रों, प्रमुखत: वैदिक मंत्रो आदि के परिप्रेक्ष्य में सुख, शांति, समृद्धि बढ़ाने के साथ विश्व एवम् देश के सामने आने वाली चुनोतियों के समाधान पर इसमें वाचन होगा, इसके द्वारा इस प्रकार की  प्रमुख समस्याओं के निराकरण का मार्ग खोजने का प्रयास किया जावेगा।
 महाराज जी द्वारा इस सम्बन्ध में अत्यंत हर्ष व्यक्त किया गया, आयोजन के सफल होने का उन्होंने आशीर्वाद प्रदान किया।
सेमीनार की विषय वस्तु को लेकर तैयार किए गए प्रारंभिक पोस्टर के अवलोकन कराते हुए गण मान्य लोगों से चर्चा, परिचर्चा एवम परामर्श लेते हुए सेमीनार कार्यक्रम के प्रारम्भिक पोस्टर के साथ गति दी जा चुकी है।
कार्यक्रम संबंधी प्रारम्भिक पोस्टर के साथ यहाँ प्रस्तुत है प. पू. श्री नारायणदास जी महाराज, महामण्डलेश्वर बालमुकंदाचार्य जी महाराज, प्रख्यात ज्योतिष शास्त्री प्रो. विनोद शास्त्री सहित ज्योतिष एवं वास्तु विद्वानों के साथ कार्यक्रम को गति प्रदान करते हुए की कुछ झलकियाँ। सेमीनार से जुड़ने के लिए  मोबाइल नंबर: 9782560245 एवम् 9414240878 से अधिक जानकारी ली जा सकती है।




















Thursday, 18 February 2016

लघु ज्योतिष एवं वास्तु संगोष्ठी दि. 15.2.16 (द्वारा "इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एंड कल्चरल एक्टिविटीज") देखें वास्तु टिप्स का उपयोगी वीडियो


संगोष्ठी में ज्योतिर्विद् महावीर कुमार सोनी के ज्योतिषीय उपायों के लेखों को लेकर प्रकाशित "ज्योतिष भारती" अंक का विमोचन भी किया गया
जयपुर। ज्योतिष वास्तु, एवं रेकी जेसी स्प्रिचुअल विद्याओं में शोध एवं अनुसन्धान को गति देने के क्रम में इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु स्प्रिचुअल एंड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट (रजि.) द्वारा जयपुर में दिनांक 15.2.16 को फिर एक लघु संगोष्ठी का आयोजन किया गया, इसमें ज्योतिषी एवं वास्तुविद के रूप में आचार्य घनश्याम शर्मा, ज्योतिर्विद् महावीर सोनी, श्रीमती गायत्री वर्मा, श्रीमती मीनाक्षी शर्मा, श्रीमती बबीता राठी, श्रीमती संतोष चतुर्वेदी, डॉ. टीना जैन, श्रीमती संगीता माथुर, दिनेश कुमावत, संकेत राज भारद्वाज आदि द्वारा हिस्सा लिया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता ज्योतिर्विद्, हस्तरेखाविद् एवं वास्तुविद महावीर कुमार सोनी द्वारा की गई, संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने बताया कि आज की संगोष्ठी का मुख्य विषय धन एवं सुख शांति बढ़ाने के उपायों पर केंद्रित रखा जा रहा है, वास्तु दोष संबंधी किन कारणों से सुख शांति बाधित होती है, कड़ी मेहनत के बाद भी आशा अनुसार धन कम आता है या अपेक्षा अनुसार टिकता नहीं है, इस सम्बन्ध में बिना विशेष तोड़फोड़ या विशेष परिवर्तन के क्या क्या उपाय हैं, पर मुख्य रूप से आज चर्चा - परिचर्चा की जावेगी, सोनी ने कहा कि सभी विद्वानजनों से अनुरोध किया कि वे अपने ज्ञान व योग्यताओं के परिप्रेक्ष्य में अपने अनुभव लिए हुए सटीक उपाय ही यहाँ शेयर करें। सोनी ने आगे बोलते हुए बताया कि संगोष्ठी के अंत से पूर्व, अर्थात आपस में चर्चा परिचर्चा के बाद कोई भी दो वक्ताओं द्वारा आमजन को वास्तु टिप्स बताने हेतु दो वीडियो भी तैयार किए जावेंगे, जो यू- ट्यूब पर अपलोड किए जावेंगे। इसके बाद इस क्रम में सभी उपस्थित ज्योतिर्विदों एवं वास्तुविदों द्वारा ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर पर चर्चा परिचर्चा की गई, विशेष रूप से बिना तोड़फोड़ के वास्तु दोष संबंधी उपचारों पर जानकारियां शेयर की गई। गोष्ठी में नागरिक कल्याण परिषद के अध्यक्ष वीरेंद्र गोदिका एडवोकेट एवं गठजोड़ की संपादक श्रीमती सुरेखा सोनी ने भी हिस्सा लिया। इस अवसर पर ज्योतिर्विद् महावीर कुमार सोनी के ज्योतिषीय उपायों संबंधी नवीन शोध एवं अनुसंधानों के लेखों को लेकर प्रकाशित "ज्योतिष भारती" अंक का विमोचन भी किया गया। इस अंक में सफलता हेतु अपना नाम कैसे अक्षरों को लेकर लिखा जावे, बालक बालिका के भावी जीवन में सफलता हेतु नामकरण की सही विधि क्या है, ग्रह शांति के उपायों में रत्न धारण में क्या क्या सावधानियां आवश्यक है, सहित विभिन्न लेख हैं। संगोष्ठी के अंत से पूर्व वीडियो जारी करने हेतु वक्ताओं के रूप में प्रख्यात ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद आचार्य घनश्याम शर्मा एवं श्रीमती मीनाक्षी शर्मा को चुना जाकर इनके द्वारा धन एवं सुखशांति बढ़ाने हेतु अपने टिप्स आमजन हेतु बताए गए, जिस पर आधारित वीडियो निम्न लिंक पर जाकर देखे जा सकते हैं -
Part 1
https://www.youtube.com/watch?v=KH-kXi3GZ1Y
Part 2
https://www.youtube.com/watch?v=cj8X7irG42c



Wednesday, 27 January 2016

ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर नि:शुल्क वर्कशॉप

जयपुर। इंटरनेशनल सेंटर फॉर ज्योतिष, वास्तु, स्पिरिचुअल एन्ड कल्चरल एक्टिविटीज ट्रस्ट की ओर से ज्योतिष एवं वास्तु विषयों पर एक लघु वर्कशॉप रविवार, दिनांक 31 जनवरी को प्रात: 10 से सांय 5 बजे तक जयपुर (राजस्थान) में आयोजित होने जा रही है। जो भी  इस वर्कशॉप में आकर इन विषयों पर समाधान चाहते हैं, जानकारी अर्जित करना चाहते हैं, वे मोबाइल पर फोन कर अपना रजिस्ट्रेशन करा लें।
वर्कशॉप पूर्णत: नि:शुल्क आयोजित हो रही है, वर्कशॉप किसान मार्ग, टोंक फाटक पर होगी, वर्कशॉप हेतु स्थान सीमित हैं, जो पूर्व में फोन द्वारा रजिस्ट्रेशन करावेंगे, वो ही इसमें हिस्सा ले सकेंगे।
डॉ. टीना जैन, कार्यक्रम संयोजक
मो. 07822061620
     09782560245

Wednesday, 9 September 2015

marriage line in palmistry - love marriage 3

लव मैरिज, प्रेम सम्बन्ध, विपरीत लिंगियों के प्रति एक दूसरे के प्रति आकर्षण आदि की जानकारी मुख्य रूप से शुक्र पर्वत पर से निकलने वाली प्रभाव रेखाओं से पता पड़ती  है, हस्तरेखाविदों में विवाह रेखा के रूप में मुख्य रूप से मान्य कनिष्ठका अंगुली के नीचे अर्थात करतल पर हृदय रेखा के ऊपर स्थित प्रधान रेखा एवं इसके नीचे - ऊपर स्थित हलकी बारीक रेखाएं प्रेम सम्बन्ध होने का संकेत अवश्य देती है किन्तु ऐसी रेखाएं ज्यादा संख्या में हो तथा साथ ही शुक्र पर्वत का आकार बड़ा एवं उठा हुआ हो तो निश्चित ही ऐसा व्यक्ति रोमांटिक किस्म के होते हैं।  शुक्र पर्वत उठा हुआ होना यह प्रदर्शित करता है की ऐसे जातकों में विपरीत लिंगियों को आकर्षित करने की अच्छी  क्षमता होती है और वे प्रेम सम्बन्ध बनाने में सफल हो ही जाते हैं। मात्र कनिष्ठका के नीचे स्थित प्रेम रेखाओं से यह निर्णय नहीं निकालना चाहिए, क्योंकि हाथ में शुक्र, मंगल आदि पर कुछ न कुछ ऐसा प्रभाव दृष्टिगोचर अवश्य  होना चाहिए।  शुक्र पर्वत पर जीवन रेखा के भीतर समानान्तर चलने वाली मंगल रेखा के साथ चलने वाली रेखाएं भी इस बात का संकेत देती है की प्रेम सम्बन्ध या प्रेम विवाह हो सकता है बशर्ते कि अन्य कई लक्षण भी इस तरह की पुष्टि करते हों। जीवन रेखा से शुरू होकर कोई रेखा मंगल के दूसरे पर्वत पर जाती है तो यह जीवन के प्रारम्भिक काल में प्रेम को दृष्टिगोचर करती है।  इसी प्रकार अंगुष्ठ के नीचे स्थित स्थान से जो रेखाएं जीवन रेखाओं की ओर जाती आड़ी रूप में दिखाई देती है वे भी  प्रेम का संकेत देती है। किसी भी परिणाम को दृढ़ता रूप से जब ही व्यक्त किया जा सकता है जब इस प्रकार के संकेतों के साथ अन्य ऐसे संकेत मेल खाते हों। यहाँ एक ऐसे ही व्यक्ति के हाथ के चित्र दिए जा रहे हैं जिसकी दो पत्नियां पहले से थी जिनसे सम्बन्ध छूट चुके हैं, कब के ही वे आपस में अलग हो चुके हैं तथा तीसरी पत्नि के साथ शान्ति पूर्वक इनका जीवन चल रहा है। यह व्यक्ति बहुत रोमांटिक किस्म के  रहें  हैं तथा बहुत सी महिलाओं से इनके नजदीकी सम्बन्ध रहे हैं। पूर्व की पोस्ट में हमने जो तथ्य बताए थे तथा इस पोस्ट में अंगुष्ठ के नीचे स्थित स्थान से जीवन रेखा से मिलती रेखाएं बताई है, की  पुष्टि   हो रही है।  साथ इस व्यक्ति का शुक्र पर्वत  भी अत्यंत उठा हुआ है।



























Thursday, 3 September 2015

marriage line in palmistry - love marriage

विवाह रेखा, प्रणय रेखा, प्रेम रेखा के बारे में सामान्यतः बहुत लोगों की जानने की उत्सुकता रहती है। ज्योतिष एवं हस्तरेखा ज्ञान के बारे में आज के दौर में थोड़ी बहुत जानकारी हर किसी को होती है।  रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड से आ रहे हैं हस्तरेखा ज्ञान की पुस्तक ले ली और उसमे यहाँ वहां पढ़कर अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने का बहुत लोग प्रयास करते देखे गए हैं,  इनमें  एक विचार विवाह रेखा सम्बन्धी भी हुआ करता  है।  ऐसे लोग कनिष्ठका अंगुली के मूल के नीचे और हृदय रेखा के ऊपर  हाथ के बाहरी भाग से प्रारम्भ होकर बुध क्षेत्र की  तरफ जाती हुई रेखाएं जितनी संख्या में देखते हैं, उतने ही  विवाह या प्रेम सम्बन्ध समझ लेते हैं तथा  अपने परिजन, मित्र आदि का हाथ देखकर उतने ही  विवाह, प्रेम सम्बन्ध आदि  की घोषणा कर देते हैं, यहाँ तक की कुछ लोग अपनी पत्नी या पति का हाथ देखकर मन ही मन में ऐसी कोई धारणा भी विकसित कर लेते हैं। यह सही कि प्रायः कर सभी ज्योतिष शास्त्रियों ने विवाह रेखा एवं प्रेम  रेखा (Love Lines) को उक्त स्थान पर ही माना है, केवल शैव सामुद्रिक आदि एक दो मत  ही विवाह रेखा का स्थान शुक्र पर्वत पर मानता है। वास्तव में उक्त मत ही अनुभव की कसौटी पर ज्यादा सही आ रहा है जिसमें कनिष्ठका अंगुली के नीचे एवं हृदय रेखा के ऊपर  के भीतर जितनी रेखाएं स्पष्ट एवं गहरी  हो उतने विवाह या गहरे सम्बन्ध स्थापित होंगे । किन्तु यह पूरी तरह से पर्याप्त नहीं है कि केवल सामान्य आधार  पर देखकर उक्त अनुसार हम विवाह या किन्हीं संबंधों की संख्या को इस अनुसार  निश्चित कर लें या  प्रेम सम्बन्ध आदि  के बारें कोई प्रकार का निर्णय कर लें।  ऐसा भी  बहुधा देखा गया है जब हाथ में स्पष्ट विवाह रेखा हो और ऐसे लोगों की शादी ही नहीं हुई है ।  बहुत लोग विवाह नहीं करते, उनसे यदि आपके घनिष्ठ सम्बन्ध हैं तो वे स्पष्ट बता देंगे की न तो उनका विवाह हुआ है और न ही किसी से प्रेम सम्बन्ध। विवाह रेखा के अलावा प्रेम सम्बन्धों की जानकारी करने के लिए उक्त रेखाओं के साथ शुक्र एवं मंगल पर्वतों  की स्थिति एवं उन पर  मौजूद प्रभाव रेखाओं को भी एक साथ समन्वय करके देखने की आवश्यकता रहती है , साथ ही इसके लिए  विवाह रेखा की मौजूदगी स्थान पर भी बारीकी से जांच करनी पड़ती है।  लेकिन यहाँ यह स्पष्ट करना पुनः उचित होगा कि केवल मात्र  कनिष्ठका अंगुली के  नीचे एवं हृदय रेखा के ऊपर स्थित स्थान पर मौजूद  विवाह रेखा के नीचे या ऊपर स्थित छोटी  एवं हल्की  पतली  रेखाओं को  हम प्रथम दृष्टया ही  प्रेम रेखाएं मानकर  भ्रमित हो जावें और जल्दी से परिणाम निकाल लें, यह किसी प्रकार से  उचित नहीं है ।  कई लोग सामान्य रूप से ऐसा देखकर अपनी पत्नी या पति तक के प्रति शक पाल करके अंदर ही अंदर तनाव बनाए रखते हैं, यह पूर्णतः अनुचित है। हम आगे इसी विषय को विभिन्न हाथों के लिए गए चित्रों आदि के साथ विभिन्न मतों के परिप्रेक्ष्य में  समय समय पर प्रस्तुत करेंगे, ज्योतिष बंधुओं एवं इस विषय में रूचि रखने वाले जानकार महिला / पुरुषों  से भी अपेक्षा करेंगे कि उन्होंने अपने अनुभवों में जो महसूस किया है, उससे हमें लिए गए हस्त चित्रों आदि के साथ अवगत करावें, ताकि इस विषय पर ज्यादा से ज्यादा अनुभव की कसौटी पर प्रमाणिक जानकारी प्रस्तुत की जा  सके।

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marriage line in palmistry - love marriage 2

भारतीय प्राचीन शास्त्रों में ज्यादातर मत  कनिष्ठका के नीचे एवं हृदय रेखा के बीच हथेली के करतल  पर स्थित रेखा को विवाह रेखा मानते हैं वहीँ पाश्चात्य मत इसे प्रणय रेखा का नाम देते हैं।  उनके मत में शुभ लक्षणों युक्त वाले हाथ में एक लम्बी और गहरी रेखा को विवाह रेखा माना जा सकेगा, यदि हाथ में अन्यत्र भी पुष्टि करने वाले लक्षण हो। हमारा मत है कि सामान्य रूप से विवाह रेखा एवं प्रेम सम्बन्धी रेखाओं का निर्णय इसी मुख्य स्थान से  किया जावे, किन्तु निर्णय लेते समय देश, काल एवं पात्र का विचार आवश्यक है, गहरी मुख्य विवाह रेखा के नीचे या ऊपर पतली हल्की रेखाओं को प्रेम रेखा या किसी विपरीत लिंगी से attachment का संकेत माना जा सकता है किन्तु अन्य लक्षणों के साथ इस हेतु ठोस रूप से शुक्र पर्वत की स्थिति  को विशेष रूप से  देखना आवश्यक होगा । हाथ में अन्य लक्षण बलवान नहीं होते, तब उनके फल स्वप्न में ही प्राप्त होते हैं या मस्तिष्क पर लगातार प्रभाव डालने रेखाएं भी ऐसी प्रणय रेखाओं के रूप में स्थान बना लेती है और ऐसी स्थितियों में हम अनुचित रूप से किसी को प्रेम सम्बन्ध होने की घोषणा कर दें, यह अनुचित होगा।  विवाह कब होगा देखने के लिए हृदय रेखा की तरफ से कनिष्ठका के बीच के स्थान को दो भागों में बांटना होगा, हृदय रेखा की ओर स्थित आधे भाग में विवाह रेखा हो तो जवानी के प्राम्भ में तथा जितनी हृदय रेखा से इसकी नजदीकी हो उतनी जल्दी विवाह होता है और यदि कनिष्ठका अंगुली वाले आधे भाग में विवाह रेखा हो तो ढलती जवानी में विवाह होता है।  यहाँ भी  देश, काल, जाति  एवं पात्र के अनुसार जल्दी एवं देर अवस्था किसे कहेंगे, अनुसार निर्णय लेना होगा।
   प्रेम या लव लाइन्स के बारे में कुछ मत शुक्र पर्वत पर मूल से उठती हुई रेखाओं को और कुछ मत अंगुष्ठ के मूल से शुक्र पर्वत पर जीवन रेखाओं की  तरफ बढ़ती हुई रेखाओं को प्रेम या प्रणय रेखाएं  या  विपरीत लिंगी से  अटेचमेंट व  सम्बन्ध  की रेखाएं मानते हैं। हमने विभिन्न मतों के परिप्रेक्ष्य में विभिन्न हाथों पर इसके परीक्षण द्वारा आधुनिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए एक स्पष्ट मत बनाने की बहुत कोशिश की है। किन्तु  इस विषय में बहुत मत हैं तथा विभिन्न ग्रह पर्वतों को ध्यान में रखते हुए देश, काल, जाति, वर्ग एवं पात्र के अनुसार निर्णय लेने  के निर्देश हैं, इसलिए स्थिति  बड़ी धुंधली है।  चूँकि मैं तो हस्तरेखाविद होने से पहले एक ज्योतिर्विद एवं न्यूमरॉलोजिस्ट हूँ, अतः जन्मपत्री होने की स्थिति में सर्व प्रथम जन्मपत्री द्वारा, जन्मपत्री नहीं होने की स्थिति में अंक ज्योतिष आदि का सहारा लेकर किसी निर्णय पर पहुँचता हूँ। अभीष्ट कार्य होगा या नहीं, इस कार्य में इस समय इन्वेस्टमेंट करूँ या नहीं, मुकदमें में स्वयं के  हित  में निर्णय होगा या नहीं, क्या प्रेम विवाह होगा तरह के  विभिन्न प्रकार प्रश्नों का सटीक उत्तर  भारतीय ज्योतिष विज्ञान  की अन्य शाखाओं यथा प्रश्न ज्योतिष विज्ञान, स्वर शास्त्र  आदि  के आधार पर चमत्कारिक रूप से  तुरंत निर्णीत हो जाते  हैं । जब  हस्तरेखा द्वारा ही फलादेश की अपेक्षा हो, यानी जन्मकुंडली आदि नहीं हो तो उस दौरान   जीवन रेखा, विवाह रेखा आदि द्वारा किसी घटना के घटित होने या विवाह का वर्ष जानने में अंक ज्योतिष का सपोर्ट ही सबसे अधिक कारगर है।  विश्व विख्यात हस्तरेखाविद कीरो ने घटना के घटित होने का वर्ष एवं दिन आदि  निकालने सम्बन्धी की गई अपनी सटीक भविष्यवाणियों में हस्तरेखा सम्बन्धी रेखाओं के साथ  प्रायःकर अंक ज्योतिष का सहारा अवश्य लिया होगा ऐसा मैं मानता हूँ।
   इसलिए मैंने इस सम्बन्ध में अपनी पहले  वाली पोस्ट पर सभी ज्योतिष प्रेमियों से अनुरोध किया है कि वे अपने अनुभव या जानकारियों को पुस्तकों के चित्रों के स्थान पर स्वयं के या अपने परिचितों आदि के  हस्त चित्रों के साथ अनुभवों के परिणामों के परिप्रेक्ष्य में ज्यादा से ज्यादा सामने लाएं और धुंधली पड़ी इस तस्वीर को साफ करे,  जिससे हस्तरेखा विज्ञान का यह पक्ष स्वतन्त्र रूप से मजबूत हो सके। मैंने जो हस्त चित्र समय समय पर अपने परामर्श के दौरान विगत वर्षों में लिए हैं, वो मैं समय समय पर अपनी उपलब्ध समय एवं श्रम शक्ति के अनुसार, उनके जीवन के घटे उक्त प्रसंगों के साथ जल्दी ही यहाँ व अपने पेज पर शेयर करूँगा, आप भी पेज पर शेयर करें,  अभी कुछ अरसे तक अपना टॉपिक विवाह एवं प्रेम रेखाओं पर केंद्रित रहेगा।
मेरा निम्न पेज हैं जिन पर आप अपने अनुभव शेयर कर सकते हैं एवं इस विषय में शोध एवं अनुसंधान को गति देने में भागीदार बन सकते हैं।
हस्तरेखा,ज्योतिष,वास्तु एवं रेकी द्वारा सुख शांति एवं समृद्धि।
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